मसूरी में आयोजित एक प्रेस वार्ता में देशभर से पहुंचे स्वतंत्र फैक्ट फाइंडिंग दल ने दूधली वनाधिकार विवाद को लेकर गंभीर सवाल उठाए। टीम ने आरोप लगाया कि प्रशासन का रवैया फोरेस्ट राइट एक्ट 2006 की भावना और प्रावधानों के अनुरूप नहीं है।
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मसूरी में आयोजित एक प्रेस वार्ता में देशभर से पहुंचे स्वतंत्र फैक्ट फाइंडिंग दल ने दूधली वनाधिकार विवाद को लेकर गंभीर सवाल उठाए।
टीम ने आरोप लगाया कि प्रशासन का रवैया फोरेस्ट राइट एक्ट 2006 की भावना और प्रावधानों के अनुरूप नहीं है।
तथा ग्राम सभा के अधिकारों की अनदेखी की जा रही है। टीम ने पूरे मामले में राज्य सरकार और केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
आठ सदस्यीय स्वतंत्र फैक्ट फाइंडिंग टीम ने 8 और 9 मई को दूधली गांव, देहरादून और मसूरी क्षेत्र का दौरा किया।
टीम में वनाधिकार कानून पर काम कर रहे राष्ट्रीय स्तर के संगठनों के प्रतिनिधि, स्वतंत्र वकील, पत्रकार और शोधकर्ता शामिल थे।
टीम ने ग्राम सभा सदस्यों, वन अधिकार समिति, वन प्रबंधन समिति, प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय लोगों से बातचीत कर पूरे मामले की जानकारी जुटाई।
“ग्राम सभा को मान्यता नहीं देना कानून के विपरीत”
प्रेस वार्ता में टीम के सदस्यों ने कहा कि एसडीएम स्तर पर ग्राम सभा की वैधता पर सवाल उठाया गया, जबकि वनाधिकार कानून 2006 के तहत ग्राम सभा को स्पष्ट अधिकार प्राप्त हैं।
टीम के अनुसार प्रशासन का यह तर्क कि दूधली नगर पालिका के वार्ड-13 में आता है इसलिए ग्राम सभा मान्य नहीं है, कानून और जनजातीय कार्य मंत्रालय की गाइडलाइन के विपरीत है।
टीम ने कहा कि कानून के तहत ऐसे गांव और बस्तियां, चाहे अधिसूचित हों या नहीं, ग्राम सभा के रूप में मान्य हैं।
साथ ही निजी वन भूमि पर भी सामुदायिक वन अधिकार और सामुदायिक वन संसाधन अधिकार के दावे किए जा सकते हैं।
“60 दिन में निर्णय होना था, अब तक कार्रवाई नहीं”
फैक्ट फाइंडिंग टीम ने बताया कि दूधली ग्राम सभा द्वारा जुलाई 2025 में सामुदायिक वन अधिकारों से संबंधित दावे प्रस्तुत किए गए थे।
लेकिन कानून में निर्धारित 60 दिन की समयसीमा के बावजूद अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया।
टीम ने इसे प्रशासनिक लापरवाही और गंभीर उदासीनता बताया। टीम के सदस्यों ने कहा कि ग्राम सभा द्वारा कई बार प्रशासन को स्मरण पत्र दिए गए, लेकिन उसके बाद भी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी।
यहां तक कि 19 फरवरी 2026 को मुख्य सचिव को भेजा गया पत्र भी अब तक विचाराधीन बताया जा रहा है।
“डर और दबाव का माहौल बनाया जा रहा”
टीम ने आरोप लगाया कि ग्राम सभा के सदस्यों के बीच डर और दबाव का माहौल बना हुआ है।
रिपोर्ट में कहा गया कि 17 अप्रैल 2026 को वन क्षेत्र में फेंसिंग को लेकर ग्राम सभा और निजी भूमि मालिकों के बीच विवाद हुआ था, जिसके बाद पुलिस में शिकायतें दर्ज हुईं।
इसके बाद ग्राम सभा ने पर्यटन दबाव और अतिक्रमण रोकने के लिए बैरियर और सूचना बोर्ड लगाए थे, लेकिन 26 अप्रैल को प्रशासन पुलिस बल के साथ पहुंचा और बैरियर हटाकर बोर्ड तोड़ दिए गए।
टीम का कहना है कि इस कार्रवाई से ग्रामीणों में भय का माहौल पैदा हुआ है। ग्राम सभा के सदस्यों ने टीम को बताया कि उन्हें लगातार धमकियां और डराने वाले फोन कॉल मिल रहे हैं।
साथ ही वन क्षेत्र में अवैध फेंसिंग और पेड़ कटान की घटनाओं को लेकर भी चिंता जताई गई।
सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
प्रेस वार्ता में टीम के सदस्यों ममता दाश, दशरथी बेहरा, सूर्यमणि भगत, जेवियर कुजूर, सृष्टि दत्ता अग्निहोत्री और अन्य सदस्यों ने सरकार से मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
टीम ने मांग की है कि दूधली ग्राम सभा के सामुदायिक वन अधिकार दावों का शीघ्र निस्तारण किया जाए।
वनाधिकार कानून को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों को संवेदनशील बनाया जाए तथा ग्राम सभा सदस्यों को सुरक्षा प्रदान की जाए।
साथ ही धमकी, अवैध फेंसिंग और पेड़ कटान के मामलों में सख्त कार्रवाई की मांग भी की गई।
फैक्ट फाइंडिंग टीम ने कहा कि वनाधिकार कानून का उद्देश्य ऐतिहासिक अन्याय को सुधारना है।
और यदि ग्राम सभाओं के वैध अधिकारों को नजरअंदाज किया गया तो इससे सामाजिक तनाव और बढ़ सकता है।