छुटमलपुर में प्रशासनिक संवेदनहीनता और लापरवाही की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने आम जनता के सब्र का बांध तोड़ दिया है।
'श्री अंबे भारत गैस एजेंसी' पर गैस वितरण को लेकर जो अव्यवस्था मची है, वह किसी बड़े घोटाले की ओर इशारा कर रही है।
एजेंसी द्वारा "दो दिन में सिलेंडर की होम डिलीवरी" का किया गया दावा अब कोरा झूठ साबित हो रहा है।
जानकारी के मुताबिक हकीकत यह है कि 14, 16, 17 और 20 तारीख को बुकिंग कराने वाले उपभोक्ता आज भी अपने हक की गैस के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
⚡ मुख्य बिंदु (Highlights)
- छुटमलपुर में प्रशासनिक संवेदनहीनता और लापरवाही की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने आम जनता के सब्र का बांध तोड़ दिया है
- 'श्री अंबे भारत गैस एजेंसी' पर गैस वितरण को लेकर जो अव्यवस्था मची है, वह किसी बड़े घोटाले की ओर इशारा कर रही है
- एजेंसी द्वारा "दो दिन में सिलेंडर की होम डिलीवरी" का किया गया दावा अब कोरा झूठ साबित हो रहा है
भीषण गर्मी और तपती धूप में, ये लोग अपना कामकाज छोड़कर एजेंसी के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ अपमान और कोरे आश्वासन ही मिल रहे हैं।
एजेंसी के कर्मचारी लोगों को टरकाते हुए कहते हैं कि "अभी स्टॉक नहीं है, चार दिन बाद आना" या "एक हफ़्ता और इंतज़ार करो।"
एजेंसी के उपभोक्ता शहजादी, रेखा, जुलेखा, मोमिना, आसमा, पूजा, अर्चना, अनिल सैनी, दीपा, मीनाक्षी, सोनिया, बबीता, नगमा, फरीदा, वाजिद, मुकेश, अलीजा, एलिजा, फरीद, अब्दुल।
नीतू सैनी, सादिक, खालिद, असलम मलिक, सुफियान, अली मोहम्मद, अहमद, सचिन चौधरी, सोनू कुमार और शहजाद अली जैसे दर्जनों ने अपनी पीड़ा बयां करते हुए बताया कि बुकिंग की रसीदें ऑफिस में जमा हैं, बावजूद इसके उनके घरों के चूल्हे ठंडे पड़े हैं।
अब सवाल यह उठता है कि यह लापरवाही क्यों? क्या एजेंसी के पास वास्तव में सिलेंडरों का स्टॉक खत्म हो चुका है।
या फिर जानबूझकर बुकिंग वाले सिलेंडर 'ब्लैक' में ऊँचे दामों पर बेचे जा रहे हैं? जनता द्वारा बुक किए गए सिलेंडर आखिर जा कहाँ रहे हैं?
क्या एजेंसी को यह हक है कि वह सरकारी नियमों को ताक पर रखकर गरीब जनता का शोषण करे?
यह स्थिति बर्दाश्त के बाहर है। ग्रामीण मीडिया के माध्यम से प्रशासन से मांग करते हैं कि इस पूरे मामले की तत्काल गहन जांच हो।
एजेंसी की कार्यप्रणाली का ऑडिट किया जाए और जनता को तत्काल गैस उपलब्ध कराई जाए।
दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, क्योंकि जनता को सिर्फ वादे नहीं, बल्कि उनका अधिकार चाहिए।
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