नई दिल्ली: डिजिटल युग में जहाँ एक ओर संचार के नए साधन जीवन को आसान बना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर साइबर ठगों ने इन साधनों का दुरुपयोग कर लोगों को अपना शिकार बनाना शुरू कर दिया है। एक चिंताजनक प्रवृत्ति सामने आई है जहाँ ठग वीडियो कॉल पर आपके 'अपने' बनकर ब...
नई दिल्ली: डिजिटल युग में जहाँ एक ओर संचार के नए साधन जीवन को आसान बना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर साइबर ठगों ने इन साधनों का दुरुपयोग कर लोगों को अपना शिकार बनाना शुरू कर दिया है। एक चिंताजनक प्रवृत्ति सामने आई है जहाँ ठग वीडियो कॉल पर आपके 'अपने' बनकर बात कर रहे हैं और फिर आपको चूना लगा रहे हैं। 3 मई तक के प्राप्त आंकड़ों ने रिकॉर्ड तोड़ फ्रॉड के मामलों को दर्ज किया है, जो एक गंभीर चेतावनी है।
हाल के दिनों में, कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहाँ पीड़ितों को उनके दोस्त, परिवार के सदस्य या परिचितों की शक्ल में वीडियो कॉल आए। ठग अक्सर डीपफेक तकनीक का उपयोग करते हैं या फिर पुरानी वीडियो रिकॉर्डिंग को एडिट करके इस तरह से पेश करते हैं जैसे कि वही व्यक्ति आपसे बात कर रहा हो। वे अक्सर किसी आपातकालीन स्थिति का बहाना बनाते हैं – जैसे कि अस्पताल में भर्ती होना, किसी कानूनी मुसीबत में फंसना, या तत्काल पैसों की ज़रूरत होना – और आपसे तुरंत पैसे भेजने का आग्रह करते हैं।
पुलिस और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, 3 मई तक की अवधि में ऐसे वीडियो कॉल फ्रॉड के मामलों में अप्रत्याशित वृद्धि देखी गई है। इन मामलों में करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है, और कई लोग अपनी जीवन भर की कमाई गंवा चुके हैं। ठगों की यह नई रणनीति बेहद खतरनाक है क्योंकि यह भावनात्मक जुड़ाव का फायदा उठाती है, जिससे पीड़ितों के लिए सच्चाई को परखना मुश्किल हो जाता है। वे इतनी कुशलता से जाल बिछाते हैं कि पीड़ित बिना सोचे-समझे उनकी बातों में आ जाते हैं।
कैसे बचें इस नई ठगी से?
- सत्यापन है ज़रूरी: यदि आपको किसी परिचित से वीडियो कॉल पर पैसों की मांग आती है, तो तुरंत सतर्क हो जाएं। कॉल खत्म होने के बाद, उस व्यक्ति से किसी अन्य माध्यम (जैसे कि सीधे फोन कॉल, मैसेज या किसी और परिवार के सदस्य के ज़रिए) संपर्क करके बात की पुष्टि ज़रूर करें।
- जल्दबाजी से बचें: ठग अक्सर आपको सोचने का मौका नहीं देते और तुरंत कार्रवाई करने का दबाव डालते हैं। किसी भी वित्तीय लेनदेन से पहले हमेशा शांत रहें और पूरी जानकारी जुटाएं।
- व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें: वीडियो कॉल पर कभी भी अपनी बैंक डिटेल्स, ओटीपी, या अन्य संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें, भले ही कॉल करने वाला कितना भी विश्वसनीय क्यों न लगे।
- संदिग्ध व्यवहार पर ध्यान दें: यदि कॉल करने वाले का व्यवहार असामान्य लगे, आवाज़ में बदलाव हो, या वह अजीब सवाल पूछे, तो तुरंत सचेत हो जाएं।
- रिपोर्ट करें: यदि आपको लगता है कि आप ठगी का शिकार हुए हैं या आपके पास कोई संदिग्ध वीडियो कॉल आई है, तो तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर रिपोर्ट करें। भारत में आप 1930 पर कॉल कर सकते हैं या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
यह आवश्यक है कि हम सभी डिजिटल दुनिया में अधिक सतर्क रहें। ठग लगातार अपने तरीके बदल रहे हैं, और हमें उनसे एक कदम आगे रहना होगा। अपने प्रियजनों को भी इस बारे में जागरूक करें ताकि वे भी इस तरह की ठगी का शिकार होने से बच सकें। याद रखें, थोड़ी सी सावधानी आपको बड़े नुकसान से बचा सकती है।