उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी वाहन स्क्रैप नीति सहारनपुर में प्रशासनिक अनदेखी और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। जिले में जहाँ एक ओर सिमरन रिसाइक्लिंग्स और AGP स्क्रैपिंग जैसे केवल दो ही अधिकृत केंद्र (RVSF) नियमों के तहत संचालित हैं।
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उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी वाहन स्क्रैप नीति सहारनपुर में प्रशासनिक अनदेखी और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है।
जिले में जहाँ एक ओर सिमरन रिसाइक्लिंग्स और AGP स्क्रैपिंग जैसे केवल दो ही अधिकृत केंद्र (RVSF) नियमों के तहत संचालित हैं।
वहीं गागलहेड़ी क्षेत्र अवैध वाहन कटान का सबसे बड़ा और सुरक्षित गढ़ बन गया है। इस पूरे काले साम्राज्य के पीछे *'राव'* नामक एक व्यक्ति के कथित 'मैनेजमेंट' और एक प्रभावशाली *'सफेदपोश' नेता* के संरक्षण की बात सामने आ रही है।
जिसके चलते प्रशासन और परिवहन विभाग ने इन अवैध यार्डों की तरफ से अपनी आंखें मूंद ली हैं।
नियमों के मुताबिक, एक वैध स्क्रैप यार्ड के लिए केंद्र सरकार के 'वाहन' पोर्टल से जुड़ाव, प्रदूषण बोर्ड की NOC, तेल-एसिड सोखने के लिए अभेद्य कंक्रीट फर्श और मशीनीकृत डिपोल्यूशन सिस्टम अनिवार्य है।
लेकिन गागलहेड़ी में संचालित ये अवैध यार्ड इन तमाम मानकों को ठेंगा दिखा रहे हैं। यहाँ न तो पर्यावरण सुरक्षा का कोई इंतजाम है।
और न ही चोरी के वाहनों के सत्यापन की कोई पारदर्शी प्रक्रिया। विश्वसनीय सूत्रों का दावा है कि 'राव' की सेटिंग के कारण ही गागलहेड़ी में बिना अनुमति के ये यार्ड धड़ल्ले से चल रहे हैं।
जबकि शहर के अन्य छोटे कबाड़ियों पर पुलिस आए दिन छापेमारी करती है।
इस दोहरी नीति ने वैध कारोबारियों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है। जहाँ रजिस्टर्ड केंद्र भारी निवेश और सरकारी टैक्स देकर नियम पालन कर रहे हैं।
वहीं ये अवैध यार्ड सस्ते दामों पर चोरी-छिपे कटान कर बाजार को दूषित कर रहे हैं। चर्चा है कि एक रसूखदार नेता का कवच होने के कारण।
यहाँ पुलिस की रेड भी नहीं होती और अगर होती भी है तो वह महज एक 'कागजी खानापूर्ति' बनकर रह जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ये अवैध यार्ड केवल राजस्व की हानि नहीं कर रहे, बल्कि पर्यावरण को जहरीला बना रहे हैं और चोरी के वाहनों को ठिकाने लगाकर अपराध को भी बढ़ावा दे रहे हैं।
ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि मुख्यमंत्री के सख्त आदेशों के बावजूद सहारनपुर का जिला प्रशासन 'राव' जैसे बिचौलियों और संरक्षण देने वाले नेताओं पर नकेल कब कसेगा?
क्या गागलहेड़ी के इन अवैध यार्डों की जांच कर इन्हें सील किया जाएगा, या फिर रसूख के आगे कानून इसी तरह बेबस बना रहेगा?