नई दिल्ली: देश के कई राज्यों में पिछले कुछ दिनों से जारी भारी ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में खड़ी रबी की फसलें पूरी तरह से तबाह ...
नई दिल्ली: देश के कई राज्यों में पिछले कुछ दिनों से जारी भारी ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में खड़ी रबी की फसलें पूरी तरह से तबाह हो गई हैं। खेतों में ओलों की सफेद चादर बिछ गई है, जिसने किसानों की साल भर की मेहनत को पल भर में मिट्टी में मिला दिया है।
यह प्राकृतिक आपदा ऐसे समय में आई है, जब फसलें कटाई के लिए तैयार थीं। गेहूं, सरसों, चना, आलू, मटर और धनिया जैसी प्रमुख फसलें इस अप्रत्याशित मौसम की मार का शिकार हुई हैं। जहां गेहूं की बालियां टूटकर बिखर गईं और दाने खेत में ही गिर गए, वहीं सरसों और चने के पौधे पूरी तरह से जमीन पर बिछ गए हैं। कई जगह तो ओलों का आकार इतना बड़ा था कि फसलों को दोबारा खड़ा कर पाना असंभव सा हो गया है। खेतों का नजारा देखकर किसानों के चेहरों पर मायूसी और गहरी चिंता साफ देखी जा सकती है।
यह सिर्फ फसलों का नुकसान नहीं, बल्कि अन्नदाताओं के सपनों का टूटना है। अपनी आंखों के सामने अपनी खून-पसीने की कमाई को बर्बाद होते देख किसान सदमे में हैं। मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के एक किसान रामेश्वर लाल ने नम आंखों से बताया, "हमने कर्ज लेकर बुवाई की थी। सोचा था कि इस बार अच्छी फसल होगी और कर्ज चुका पाएंगे, लेकिन अब सब खत्म हो गया। खेत में खड़ी फसल अब सिर्फ कचरे का ढेर लग रही है। पिछले दो दिनों से सो भी नहीं पा रहा हूं।" उत्तर प्रदेश के सीतापुर के एक अन्य किसान मोहनलाल कहते हैं, "अब हम क्या खाएंगे और बच्चों को क्या खिलाएंगे? सरकार को हमारी सुध लेनी चाहिए और जल्द से जल्द मदद करनी चाहिए।"
इस व्यापक नुकसान से किसानों पर आर्थिक बोझ और बढ़ गया है। कई किसान पहले से ही कर्ज के बोझ तले दबे हुए थे, और अब यह नई आपदा उन्हें और गहरे संकट में धकेल सकती है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए तो यह स्थिति और भी भयावह है, जिनके पास ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए कोई बड़ा आर्थिक सहारा नहीं होता। फसल बीमा योजना के तहत भी कई किसानों को समय पर और पर्याप्त मुआवजा नहीं मिल पाता, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। प्रक्रियागत देरी और जटिलताएं अक्सर किसानों को उनके हक से वंचित कर देती हैं।
किसान संगठनों ने सरकार से तत्काल 'गिरदावरी' (फसल क्षति का आकलन) करवाकर किसानों को उचित और पर्याप्त मुआवजा देने की मांग की है। उन्होंने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द लाभ पहुंचाने और बैंकों से लिए गए कृषि ऋणों की वसूली पर फिलहाल रोक लगाने की भी अपील की है। स्थानीय प्रशासन से भी त्वरित सर्वेक्षण और राहत कार्यों में तेजी लाने का आग्रह किया गया है।
यह समय किसानों के साथ एकजुटता से खड़े होने का है। सरकार और समाज दोनों को मिलकर इस मुश्किल घड़ी में अन्नदाताओं का सहारा बनना होगा, ताकि वे इस सदमे से उबरकर दोबारा अपने खेतों में मेहनत कर सकें। अन्यथा, इस प्राकृतिक आपदा का असर सिर्फ किसानों पर नहीं, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। किसानों को तत्काल आर्थिक सहायता और मनोबल बढ़ाने की आवश्यकता है ताकि वे इस संकट से निकल सकें।