सहारनपुर जिले के हरौड़ा गांव में स्थित ALM Industries Ltd (मीट प्रोसेसिंग यूनिट) पर बिना ट्रीटमेंट के केमिकल युक्त गंदा पानी छोड़ने के हाल ही में गंभीर आरोप लगे है।
क्षेत्र निवासी ने जिलाधिकारी (DM) को शिकायत देकर तत्काल जांच और कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत के अनुसार, फैक्ट्री से निकलने वाला प्रदूषित पानी बिना किसी उपचार के नाले और आसपास के खेतों में डाला जा रहा है।
बाईपास लाइन लगाकर अवैध डिस्चार्ज किया जा रहा है, जो बरसात के मौसम में सीधे हिंडन नदी में पहुंच जाता है।
इससे खेतों की फसलें बर्बाद हो रही हैं, भूजल प्रदूषित हो रहा है और गांव के लोगों तथा पशुओं के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
शिकायतकर्ताओं के पास प्रदूषण के फोटो और वीडियो साक्ष्य होने का दावा है। उन्होंने फैक्ट्री की तत्काल जांच कराने, पानी के सैंपल लेकर प्रयोगशाला परीक्षण कराने और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
साथ ही अपनी और परिवार की सुरक्षा की भी अपील की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन तुरंत कार्रवाई नहीं करता तो क्षेत्र का पर्यावरण और स्वास्थ्य और बिगड़ सकता है।
ग्रामीणों की सेहत पर संभावित गंभीर नुकसान
अगर आरोप सही साबित होते हैं तो मीट प्रोसेसिंग यूनिट से निकलने वाले अपशिष्ट में खून, मांस के अवशेष, फैट, अमोनिया, नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, बैक्टीरिया और भारी धातुएं हो सकती हैं।
यह दूषित पानी खेतों और नालों से भूजल में मिलकर गांव वालों के पीने के पानी को जहरीला बना रहा है।
संभावित स्वास्थ्य जोखिम होने पर पेट संबंधी बीमारियां जैसे डायरिया, हेपेटाइटिस, उल्टी और दस्त। त्वचा संबंधी समस्याएं जैसे स्किन इंफेक्शन, खुजली और डर्मेटाइटिस।
कैंसर का बढ़ता खतरा, खासकर लिवर कैंसर, ब्लड कैंसर और कोलोरेक्टल कैंसर।शिशुओं में ब्लू बेबी सिंड्रोम, थायरॉइड समस्या, श्वसन रोग, आंखों में जलन और बच्चों में विकास संबंधी जोखिम।
पशुओं पर असर, जिससे दूध और मांस में प्रदूषण फैलकर इंसानों तक पहुंच सकता है।
हिंडन नदी पहले से ही औद्योगिक प्रदूषण से बुरी तरह प्रभावित है।
सहारनपुर जिले में कैंसर क्लस्टर की कई रिपोर्ट्स आई हैं, जहां दूषित पानी से स्वास्थ्य संकट गहरा रहा है।
क्या ग्रामीणों की सेहत की जांच भी जरूरी नहीं?
ग्रामीणों की सेहत की जांच अत्यंत जरूरी है। केवल फैक्ट्री के पानी के सैंपल लेना पर्याप्त नहीं। प्रभावित गांव के लोगों का स्वास्थ्य सर्वे कराना चाहिए, जिसमें ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट, कैंसर स्क्रीनिंग और भूजल के नियमित परीक्षण शामिल हों।
स्वास्थ्य विभाग को तुरंत सक्रिय होकर ग्रामीणों की मेडिकल जांच करानी चाहिए, ताकि समय रहते बीमारियों का पता लगे और इलाज शुरू हो सके।
कानूनी प्रावधान और सजा
यह मामला जल (प्रदूषण6 रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 का सीधा उल्लंघन है। धारा 24 के तहत नदी, नाले या भूमि पर प्रदूषित पदार्थ डालना प्रतिबंधित है।
धारा 25 और 26 के अनुसार बिना UPPCB की पूर्व अनुमति के डिस्चार्ज अवैध है। उल्लंघन पर 1ज्ञ वर्ष 6 महीने से 6 वर्ष तक कैद और जुर्माना हो सकता है।
दोहराए जाने पर सजा 2 से 7 वर्ष तक बढ़ सकती है और प्रतिदिन 5,000 रुपये अतिरिक्त जुर्माना लग सकता है।
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 15 के तहत भी 5 वर्ष तक कैद या 1 लाख रुपये तक जुर्माना या दोनों हो सकता है।
जारी रहने पर प्रतिदिन 5,000 रुपये अतिरिक्त जुर्माना लग सकता है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) पहले भी हिंडन नदी प्रदूषण पर कई फैक्टरियों पर संज्ञान ले चुका है और बंदी के आदेश दिए हैं।
प्रशासन से अपील है कि शिकायत पर गंभीरता से संज्ञान लिया जाए, फैक्ट्री की जांच के साथ ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
ताकि गांव वालों की सेहत, फसलें और पर्यावरण बचाया जा सके। यह मुद्दा पूरे क्षेत्र के भविष्य से जुड़ा है, इसलिए तुरंत कार्रवाई जरूरी है।
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बिल्कुल अवैध काम किया जा रहा है
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