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अवैध पैथोलॉजी लैबों का जाल स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी

person SONU RANA calendar_today 22 Apr 2026, 07:16 AM visibility 38 व्यूज़ menu_book 1 मिनट रीड
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रिपोर्टर : सोनू राणा 

छुटमलपुर फतेहपुर थाना क्षेत्र में मरीजों से जांच के नाम पर खुलेआम लूट मची हुई है। कस्बे से लेकर आसपास के गांवों तक बिना पैथोलॉजिस्ट।

बिना रजिस्ट्रेशन और बिना किसी कानूनी अनुमति के दर्जनों अवैध पैथोलॉजी लैबें धड़ल्ले से चल रही हैं।

लेकिन स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की ओर से आज तक इनमें से किसी भी लैब पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

इन अवैध लैब संचालकों ने सरकारी अस्पतालों और प्राइवेट अस्पतालों को भी हाईजैक कर रखा है।

अधिकांश लैबें सरकारी अस्पतालों के ठीक आसपास या अगल-बगल में खुली हुई हैं। कई चिकित्सक मरीजों को अपनी लैब पर ही जांच कराने की सलाह दे रहे हैं।

जिससे मरीजों का सीधा शोषण हो रहा है।शासन द्वारा लैब संचालन के सख्त नियम हैं, लेकिन छुटमलपुर में इनकी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

डीएमएलटी या उनके सहयोगी रिपोर्ट पर साइन कर रहे हैं, जबकि नियम के मुताबिक केवल एमबीबीएस या एमडी पैथोलॉजिस्ट ही लैब चला सकते हैं और रिपोर्ट साइन कर सकते हैं।

इन लैबों के पास पॉल्यूशन बोर्ड का रजिस्ट्रेशन नहीं है, न ही पंजीकृत मेडिकल वेस्ट डिस्पोजल फर्म से कोई संबंध है।

कस्बे में सिर्फ चार-पांच लैबें पंजीकृत बताई जा रही हैं, जबकि कमालपुर रोड, रुड़की रोड, हलवाना रोड, देहरादून रोड, सहारनपुर रोड और आसपास के इलाकों में दर्जनों अवैध लैबें खुली हुई हैं।

कई लैबों पर नाबालिग बच्चे खून के सैंपल लेते नजर आ रहे हैं। कुछ सप्ताह पहले एक ही व्यक्ति की दो अलग-अलग रिपोर्टों में प्लेटलेट्स की संख्या में एक लाख का फर्क आया, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

मेडिकल स्टोरों पर भी खून के सैंपल लिए जा रहे हैं, जो बेहद खतरनाक है। हाल के वर्षों में निजी लैबों का धंधा तेजी से बढ़ा है। इनमें सस्ते और घटिया उपकरण लगाए गए हैं।

रजिस्ट्रेशन की कोई व्यवस्था न होने से सरकारी नियंत्रण पूरी तरह गायब है, जिसका सीधा नुकसान आम मरीजों को हो रहा है।

क्या स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन इस बड़े पैमाने पर हो रहे मरीजों के शोषण और स्वास्थ्य से खिलवाड़ की अनदेखी करते रहेंगे?

अवैध लैबों पर तुरंत छापेमारी और सख्त कार्रवाई की जरूरत है। दोषी चिकित्सकों और लैब संचालकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

मरीजों की सेहत से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की जाती है।

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